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ग्लूकोमा और मोतियाबिंद में क्या अंतर है? - Glaucoma vs Cataracts in Hindi

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Medically Reviewed by Dr. Monika Dubey
Written by Shivani Arora, last updated on 5 September 2024| min read
ग्लूकोमा और मोतियाबिंद में क्या अंतर है? - Glaucoma vs Cataracts in Hindi

Quick Summary

ग्लूकोमा और मोतियाबिंद में क्या अंतर है? आजकल लोग अंधेपन का शिकार तेजी से हो रहे हैं। अंधेपन का मुख्य कारण मोतियाबिंद और ग्लूकोमा हैं। इसलिए मोतियाबिंद और ग्लूकोमा में अंतर समझना हमारे लिए बेहद जरूरी हो जाता है। 

 

  • मोतियाबिंद आंख के लेंस का धुंधला होना है, जबकि ग्लूकोमा आंख की नसों को नुकसान पहुंचाता है।
  • मोतियाबिंद के कारण आंखों की रोशनी धीरे-धीरे कम होती जाती है, जबकि ग्लूकोमा के कारण आंखों की रोशनी अचानक कम हो जाती है।
  • मोतियाबिंद का इलाज सर्जरी द्वारा किया जा सकता है, जबकि ग्लूकोमा का इलाज दवाओं और सर्जरी द्वारा किया जा सकता है।

ग्लूकोमा और मोतियाबिंद में क्या अंतर है? आजकल लोग अंधेपन का शिकार तेजी से हो रहे हैं। अंधेपन का मुख्य कारण मोतियाबिंद और ग्लूकोमा हैं। इसलिए मोतियाबिंद और ग्लूकोमा में अंतर समझना हमारे लिए बेहद जरूरी हो जाता है। 

 

ग्लूकोमा और मोतियाबिंद क्या होता है? 

ग्लूकोमा: सामान्य तौर पर ग्लूकोमा तब होता है जब आंख के अंदर मौजूद तरल पदार्थ का प्रेशर बढ़ जाता है और आंख की नस ( ऑप्टिक नर्व ) ब्लॉक हो जाती है। इससे आंखों से दिखना बिल्कुल बंद हो जाता है। लेकिन आजकल सामान्य प्रेशर होने पर भी ग्लूकोमा देखने को मिल रहा है। 

मोतियाबिंद: इसमें आंख के लेंस पर प्रोटीन फैल जाता है जिससे पूरा लेंस धुंधला पड़ जाता है और रोगी को धुंधला दिखाई पड़ता हैI एक समय आता है जब दिखना लगभग बंद हो जाता है।  

मोतियाबिंद और ग्लूकोमा में कई अंतर हैं जिसे अलग अलग वर्गों में बांटकर समझा जा सकता है। 

ग्लूकोमा और मोतियाबिंद के जोखिम कारक (रिस्क फैक्टर्स)

  1. यह किसी को भी हो सकता है लेकिन अगर आप नीचे बताए गए कैटेगरी में आते हैं तो आपको ग्लूकोमा का ज्यादा जोखिम है। 
  2. अगर आपकी उम्र 40 साल से अधिक हो चुकी है।   
  3. यदि पारिवारिक इतिहास रहा है यानी आपके पीढ़ी में पिता, दादा, नाना आदि को हुआ है। 
  4. अगर आप एक अफ्रीकन अमेरिकन या एशिया मूल के हैं । 
  5. यदि दूर दृष्टि दोष या निकट दृष्टि दोष से पीड़ित हैं। 
  6. आंख में चोट लगी हो। 
  7. अगर आप लंबे समय से स्टेरॉइड ले रहे हैं। 
  8. अगर आपकी कॉर्निया बीच में पतली है। 
  9. यदि आपके आंख की ऑप्टिक नर्व काफी पतली है। 
  10. अगर आपको शुगर है या माइग्रेन है या हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है। 
  11. अगर आपको एक से ज्यादा जोखिम कारक ( रिस्क फैक्टर्स ) हैं तो आपको ग्लूकोमा का अधिक जोखिम है।

मोतियाबिंद के जोखिम कारक 

अगर 

  1. आपको डायबिटीज है। 
  2. आप धूम्रपान कर रहे हैं। 
  3. शराब का सेवन अधिक कर रहे हैं। 
  4. आपकी उम्र 40 से अधिक है।
  5. मोतियाबिंद होने का पारिवारिक इतिहास रहा है यानी आपके पिता, दादा, नाना आदि को हुआ हो।  
  6. आपके आंख में चोट लगी हुई है। 
  7. आपके शरीर के ऊपरी हिस्से में रेडिएशन से उपचार हुआ है। 
  8. आप धूप में अधिक रहते हैं। 
  9. आप आर्थराइटिस के लिए दवा खा रहे हैं। 
  10. आप स्टेरॉइड ले रहे हैं।
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ग्लूकोमा और मोतियाबिंद के लक्षण 

अगर ग्लूकोमा या मोतियाबिंद होता है तो कुछ लक्षणों को महसूस किया जा सकता है। नीचे बताए गए लक्षणों के आधार पर आप खुद को जांच सकते हैं।  

ग्लूकोमा के लक्षण

अगर

  1. आपके आंखों में तेज दर्द होता है तो यह ग्लूकोमा का लक्षण हो सकता है। 
  2. आपकी आंखें लाल रहने लगी हों तो यह ग्लूकोमा का लक्षण हो सकता है। 
  3. आपको धुंधला दिख रहा है तो ग्लूकोमा होने का संकेत हो सकता है।
  4. जी मिचलाना भी ग्लूकोमा होने का एक लक्षण है। 
  5. आपके साथ ऊपर बताई गई सभी चीजें हो रही हैं तो ये साफ साफ ग्लूकोमा का लक्षण हो सकता है। 

मोतियाबिंद के लक्षण

  1. आपको रात में ठीक से दिखना बंद हो जाता है। 
  2. बल्ब या हेडलाइट की रोशनी आपके आंखों को चकाचौंध कर देती है। 
  3. सभी रंग आपको धुंधले दिखते हैं। 
  4. आंखों पर धुंधलापन छा जाता है।
  5. किसी भी चीज को देखने पर वह धुंधली दिखती है। 
  6. अगर आप किसी रोशनी जैसे बल्ब या दीपक को देखेंगे तो उसके अगल बगल भी आपको ( प्रभामंडल ) रोशनी के छल्ले दिखेंगे। 

ग्लूकोमा और मोतियाबिंद होने के कारण

ग्लूकोमा का कारण

  1. विशेषज्ञ ग्लूकोमा होने का स्पष्ट कारण नहीं बताते हैं लेकिन उनका कहना होता है कि जिन लोगों के आंख में हाई प्रेशर रहता है उन लोग को ग्लूकोमा का जोखिम रहता है। 
  2. जरूरी नहीं है कि जिसके आंख में प्रेशर अधिक हो, उसे ग्लूकोमा हो ही जाएगा। अगर आपकी आंखों की सहन क्षमता अधिक है तो अधिक प्रेशर होने पर भी आपकी आंखें ग्लूकोमा से बची रहेंगी।
  3. लेकिन अगर आपके आंखों की सहन शक्ति कम है तो थोड़े से प्रेशर में भी ऑप्टिक नर्व खराब हो सकती है और ग्लूकोमा हो सकता है। 

मोतियाबिंद होने का कारण

  1. 40 साल की उम्र होने पर लेंस के प्रोटीन का टूटना शुरू हो जाता है। 
  2. धूम्रपान और शराब का सेवन करने से मोतियाबिंद तेजी से बढ़ता है। 
  3. डायबिटीज और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं मोतियाबिंद होने का कारण बन सकती हैं। 
  4. अगर आप धूप में बिना धूप वाले चश्मे लगाए ज्यादा समय बिताते हैं। 
  5. अल्ट्रा वायलेट किरणें मोतियाबिंद होने का एक मुख्य कारण हैं। 

ग्लूकोमा और मोतियाबिंद का निदान 

ग्लूकोमा का निदान (डायग्नोसिस)

आपकी 

  1. आंखों का प्रेशर मापा जाता है। 
  2. आंखों में मौजूद ड्रेनेज कोण देखा जाता है। 
  3. ऑप्टिक नर्व का परीक्षण किया जाता है। 
  4. अगल बगल के दृष्टि क्षमता का परीक्षण किया जाता है। 
  5. कॉर्निया के मोटाई को मापा जाता है।  
  6. ऑप्टिक नर्व को कंप्यूटर या पिक्चर के द्वारा मापा जाता है। 

इन सभी चरणों को पूरा करने के बाद आपके आंख की हेल्थ रिपोर्ट तैयार की जाती है। 

मोतियाबिंद का निदान (डायग्नोसिस)

  1. आपके आंखों के परीक्षण के लिए आंख का ड्रॉप डाला जाता है। 
  2. ड्रॉप आपके आंखों की पुतलियों को बड़ा कर देता है जिससे परीक्षण करने में आसानी हो।
  3. डॉक्टर आपके आंख के सभी हिस्सों जैसे कॉर्निया, आइरिस,लेंस आदि का जांच करते हैं। 
  4. विशेष स्लिट लैंप सूक्ष्मदर्शी की मदद से आंखों में मौजूद कमियां पता लगा ली जाती हैं। 
  5. आपके रेटीना और ऑप्टिक नर्व का परीक्षण करके मोतियाबिंद का पता लगाया जाता है। 
  6. आपके आंखों की दृष्टि क्षमता और स्पष्टता की जांच के लिए आपसे छोटे और बड़े अक्षरों को पढ़वाया जाता है। 
  7. इन सभी चरणों को पूरा करके आपके आंखों की रिपोर्ट तैयार की जाती है। 

 ग्लूकोमा और मोतियाबिंद के उपचार  

ग्लूकोमा का उपचार

दवाइयों का इस्तेमाल अक्सर साइड इफेक्ट्स दे जाता है। इसलिए ग्लूकोमा के उपचार में विशेषज्ञों द्वारा दो प्रकार के सर्जरी की सलाह दी जाती है।

  1. ट्रैबेकुलोप्लास्टी : इसमें लेजर के माध्यम से ड्रेनेज कोण को सही किया जाता है जिससे द्रव आसानी से बाहर निकल जाता है और आंख का प्रेशर कम हो जाता है।
  2. इरिडोटोमी : इस सर्जरी में लेजर के माध्यम से आंख की पुतली में छोटा छेद किया जाता है। इससे द्रव सही ड्रेनेज कोण पर बाहर निकल जाता है। 

मोतियाबिंद का उपचार 

  1. अगर आंखों का धुंधलापन बढ़ जाता है और रोजमर्रा की जिंदगी में दखल देने लगता है तब विशेषज्ञ सर्जरी की सलाह देते हैं। क्योंकि मोतियाबिंद को ठीक करने का एकमात्र इलाज सर्जरी ही है। 
  2. सर्जरी में आपके आंखों के प्राकृतिक लेंस को निकालकर आर्टिफिशियल लेंस लगा दिया जाता है। सर्जरी में लेजर की मदद से धुंधले लेंस को बाहर निकाला जाता है और नए लेंस को लगा दिया जाता है। इस लेंस को इंट्राऑक्यूलर लेंस बोला जाता है। 

संबंधित लेखजेप्टो मोतियाबिंद सर्जरी क्या है?

हेक्साहेल्थ के बारे में 

हेक्साहेल्थ आपके हेल्थ से जुड़ी सभी समस्याओं का समाधान करता है। यह प्लेटफॉर्म आपको ऑनलाइन या ऑफलाइन विशेषज्ञों से जुड़कर परामर्श लेने की सुविधा देता है। मोतियाबिंद और ग्लूकोमा के अलावा 50+ रोगों के लिए विशेषज्ञों से सलाह ली जा सकती है। अच्छे और विश्वसनीय अस्पताल से लेकर डॉक्टर ढूंढने में आपकी मदद करता है। यहां के नेत्र विशेषज्ञ आपके आंख का प्रॉपर डायग्नोसिस करके बताते हैं कि आपको मोतियाबिंद है या ग्लूकोमा। उसके बाद अच्छे से अच्छे उपचार की सलाह देते हैं। सर्जरी के साथ और सर्जरी के बाद भी हेक्साहेल्थ आपके हेल्थ का पूरा ध्यान रखता है। 

अधिक जानकारी के लिए वेबसाइट पर जाएं – Hexahealth.com

Last Updated on: 5 September 2024

Disclaimer: यहाँ दी गई जानकारी केवल शैक्षणिक और सीखने के उद्देश्य से है। यह हर चिकित्सा स्थिति को कवर नहीं करती है और आपकी व्यक्तिगत स्थिति का विकल्प नहीं हो सकती है। यह जानकारी चिकित्सा सलाह नहीं है, किसी भी स्थिति का निदान करने के लिए नहीं है, और इसे किसी प्रमाणित चिकित्सा या स्वास्थ्य सेवा पेशेवर से बात करने का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।

समीक्षक

Dr. Monika Dubey

Dr. Monika Dubey

MBBS, MS Obstetrics & Gynaecology

21 Years Experience

A specialist in Obstetrics and Gynaecology with a rich experience of over 21 years is currently working in HealthFort Clinic. She has expertise in Hymenoplasty, Vaginoplasty, Vaginal Tightening, Labiaplasty, MTP (Medical Termination...View More

लेखक

Shivani Arora

Shivani Arora

BA Journalism and Mass Communication

2 Years Experience

She is an accomplished new-age professional who has interviewed prominent personalities such as Bhaichung Bhutia, G. Sathiyan, Shashi Tharoor, etc. A content writer interested in health communication, graphic desi...View More

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